MAN of SUBSTANCE!

May be not in the beginning But surely at the end He is always besides me Holding my hand. I took my first step With all his love and care It is my Father who rescued me From all the moments of despair. The most affectionate man with whom All the childhood memories I share … Continue reading MAN of SUBSTANCE!

All She Aspire!

It was a beautiful night The moon was shinning bright Cool breeze was in such a soft flow Even the lit candles didn't blow. Merely happened by some chance For a moment they had a glance Like a whirlwind they passed by each other Though neither of them was a frother. Still when she watched … Continue reading All She Aspire!

हाँ मैंने उन्हें बूढ़ा होते देखा है!

मज़बूत कंधे जो कभी बोझ उठाते थे सारा खुशी खुशी बनते थे सभी के जीने का सहारा उन्हीं कन्धों को, सहारे के लिए तरसते देखा है हाँ मैंने उन्हें बूढ़ा होते देखा है। क्या लाऊँ, क्या चाहिए जो हमेशा यही पूछा करते थे ख्व़ाहिशें सबकी पूरी करने में दिन रात जुटे रहते थे अपनी आम … Continue reading हाँ मैंने उन्हें बूढ़ा होते देखा है!

कलम उठी है!

कलम उठी है जो आज मेरी ये कलम नहीं तलवार है स्याही की हर इक बूंद में छुपी दुश्मनों की हार है। वो छुपे रहे बिलों में अपने हम सीना ताने बाहर हैं भारत के इन वीर सपूतों को हम नतमस्तक बारम्बार हैं। सर ना झुकेगा ये किसी के भी आगे चाहे कटने को तैयार … Continue reading कलम उठी है!

ज़रूरी तो नहीं!

ज़रूरी तो नहीं जैसा चाहते हैं हम वो भी वैसा ही चाहें हो नींद इन आँखों में तभी ख़्वाब आएँ। खुली आँखों से देखा है एक ख़्वाब हमने भी रहें सब दिदार में मसरूफ़ वो मेरी रूह को छू जाए। बहुत सी ख्वाहिशें ज़हन में लिए चले हैं हम भी और बन्दगी ऐसी कि हर … Continue reading ज़रूरी तो नहीं!

“काश”

करी थी कोशिश हमने भी करें ना ज़िक्र तुमसे कभी बातें जो ज़हन में थी मेरे रख लेते ताउम्र उनको वहीं। कोई उम्मीद भी ना थी ना ही थी कोई भी आस कोई वजह भी कहाँ थी कह देने को सारे राज़। ना था आसान कहना भी चुप रहना भी था मुश्किल बहुत हमने दिल … Continue reading “काश”